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आज से नवरात्र : 48 मिनट ही रहेगा कलश स्थापना का मुहूर्त

आज कलश स्थापना के साथ माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना

डेस्क : पितृपक्ष के बाद शारदीय नवरात्र का शुभारंभ आज से हो रही हैं। आज से शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होगी। नवरात्र की शरुआत प्रतिपदा तिथि को अखंड ज्योति और कलश स्थापना के साथ होगी। पवित्र कलश की स्थापना के बाद ही देवी की उपासना की जाती है। आइए जानें इस साल कलश स्थापना के लिए साधकों को कितना समय मिल रहा है।

आज कलश स्थापना के साथ नवरात्र शुरू हो जाएगी। इस दौरान साधकों द्वारा नौ दिन तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाएगी। बताया जाता है कि भारत के बड़े बड़े नेता और उद्योगपति भी नवरात्र व्रत रखते हैं और अपने घरों में कलश स्थापना कर नौ दिनों तक पूजा अर्चना करते हैं। वहीं, विधि विधान के साथ नौ दिनों तक पूजा अर्चना के सारे नियमों का भी पालन करते हैं।

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सोमवार, 26 सितंबर को सुबह 03 बजकर 23 मिनट से प्रारंभ होगी और मंगलवार, 27 सितंबर को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर इसका समापन होगा।

जानें घटस्थापना मुहूर्त का शुभ मुहूर्त और विधि

शारदीय नवरात्र में देवी की पूजा से पहले 26 सितंबर को यानी आज घटस्थापना होगी। आज सुबह 06 बजकर 28 मिनट से लेकर 8 बजकर 01 मिनट तक कलश स्थापना कर सकेंगे। घटस्थापना के लिए साधकों को पूरा 01 घण्टा 33 मिनट का समय मिलेगा। जिन घरों में लोग व्रत रखना चाहते हैं, वहां इसी एक घंटे के भीतर कलश की स्थापना करनी होगी।

ऐसे करें कलश स्थापना

कलश की स्थापना मंदिर के उत्तर-पूर्व दिशा में करनी चाहिए और मां की चौकी लगा कर कलश को स्थापित करना चाहिए। सबसे पहले उस जगह को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वास्तिक बनाकर कलश को स्थापित करें। कलश में आम का पत्ता रखें और इसे जल या गंगाजल भर दें। साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की एक गांठ कलश में डालें। कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र से लपेट कर रखें। चावल यानी अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें। इन्हें लाल या गुलाबी चुनरी ओढ़ा दें।

कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक की स्थापना भी की जाती है। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करें। हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्र जाप करें। फूल और चावल मां के चरणों में अर्पित करें। मां शैलपुत्री के लिए जो भोग बनाएं। वह गाय के घी से बने होने चाहिए। मान्यता है कि सिर्फ गाय के घी चढ़ाने से भी बीमारी व संकट से छुटकारा मिलता है।

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