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EditorialJharkhandRanchi

संसदीय क्षेत्र के छह विधानसभा में सांसद संजय सेठ की फोकस केवल रांची पर, उपेक्षित रही ईचागढ़ और सिल्ली की जनता

विश्वरूप पांडा
रांची लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें ईचागढ़, सिल्ली, कांके, खिजरी, हटिया और रांची शामिल हैं। 2019 की लोकसभा चुनाव में भाजपा और आजसू गठबंधन से संजय सेठ ने जीत हासिल की है। अभी पुनः लोकसभा चुनाव की हलचल बढ़ गई हैं। पक्ष और विपक्ष चुनावी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। रांची के सांसद संजय सेठ के अबतक के चार साल के कार्यकाल पर गौर करें तो देखा जा सकता है कि उन्होंने अधिकांश समय रांची को ही दिया और रांची शहर पर ही उनकी फोकस रही। कुल मिलाकर कहा जाय तो यह गलत नहीं होगा कि संजय सेठ केवल रांची शहर के सांसद बनकर रह गए हैं। सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के छह विधानसभा क्षेत्र में से केवल दो विधानसभा – रांची और हटिया विधानसभा क्षेत्र में ही अधिक सक्रिय रहते हैं। इन दो विधानसभा क्षेत्र में जितनी सक्रियता रहती हैं, उसकी तुलना में अन्य चार विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता काफी कम रहती हैं। कुल छह विधानसभा में ईचागढ़ और सिल्ली विधानसभा क्षेत्र के जनता सबसे ज्यादा उपेक्षित रहीं।

सांसद संजय सेठ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा आलाकमान को खुश रखने तथा रांची शहर के जनता का ध्यान अपनी ओर बरकरार रखने के लिए काफी कुछ किया है। माना जा रहा है सुर्खियों में बने रहने के लिए सांसद शहरी क्षेत्र पर ज्यादा फोकस रखते हैं ताकि मीडिया की नजर में बने रहें और भाजपा आलाकमान से वाहवाही बटोरने का मौका मिले।

सांसद संजय सेठ ने कई तरह के नए प्रयोग भी किए है जो केवल रांची शहर वासियों के लिए फायदेमंद साबित हुई। जैसे कि सांसद खेल महोत्सव, सांस्कृतिक महोत्सव, नमो बुक बैंक, नमो टॉय बैंक, नमो रोटी बैंक इत्यादि शामिल हैं लेकिन ये सभी केवल रांची में ही हुए। इन सभी कार्यक्रम का केंद्रबिंदु रांची शहर ही रहा। जबकि ईचागढ़ और सिल्ली जैसे ग्रामीण इलाकों में भी इन सारी व्यवस्था की जरूरत है। बल्कि रांची शहर के मुकाबले गांवों में इन सुविधाओं का घोर अभाव है। ऐसे में सांसद संजय सेठ को चाहिए था कि ऐसे सुविधाओं की व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में करें।

भले ही नमो टॉय बैंक, नमो रोटी बैंक जैसा नया आईडिया ग्रामीण क्षेत्रों में उतना कारगर साबित नहीं हो सकता है लेकिन बुक बैंक (लाइब्रेरी) की स्थापना जरूर करना चाहिए था। इसके अलावा ईचागढ़ और सिल्ली के खिलाड़ियों और छौ नृत्य कलाकारों के कंधे पर ही सांसद खेल महोत्सव और सांसद सांस्कृतिक महोत्सव जैसे कार्यक्रम को सफल बनाने का दायित्व रहा। ऐसे में इन कार्यक्रमों का आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में भी हो सकता था और वह अधिक कारगर साबित हो सकता है। परंतु, सांसद ने ऐसा नहीं किया? कारण कुछ भी हो सकता है लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सांसद संजय सेठ कम खर्च में ज्यादा वाहवाही बटोरने में माहिर हैं। इसलिए हर छोटे बड़े कार्यक्रम के लिए वह रांची शहर को ही चुनते हैं, जहां कम खर्च में कार्यक्रम सफल करते हैं और लंबे समय तक सुर्खियों में बने रहते हैं। इतना ही नहीं रांची शहर के भीतर कार्यक्रम संपन्न कराने के बाद उन कार्यक्रमों की फोटो, वीडियो, मैगजीन छपवाकर दिल्ली रवाना हो जाते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा आलाकमान को दिखाकर वाहवाही बटोर लेते हैं।

पिछले चार साल के कार्यकाल में सांसद संजय सेठ ने रांची शहर के साफ सफाई, पुल – पुलिया निर्माण, जल संरक्षण समेत अन्य जरूरतों के लिए सदैव तत्पर देखा गया है, कई अभियान चलाया। लेकिन ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में साफ सफाई के नाम पर शून्य हैं। यहां तक की चांडिल (ईचागढ़ विधानसभा) के लोग एक अदद बाईपास सड़क की मरम्मत और नाली सफाई की मांग करते रहे और सांसद संजय सेठ आश्वासन देते रहे। यही कारण है कि फिलहाल ईचागढ़ विधानसभा के वैसे भाजपा और आजसू के कार्यकर्ता नाराज हैं जिन्होंने 2019 के चुनाव में बढ़ चढ़कर समर्थन किया था।


समय समय पर डैमेज कंट्रोल करने के लिए सांसद सेठ लोकसभा के सदन में ईचागढ़ विधानसभा के मुद्दों पर आवाज उठाई है लेकिन जनता को आवाज उठाने से नहीं बल्कि समाधान होने पर प्रसन्नता मिलती हैं। सांसद संजय सेठ ने ईचागढ़ विधानसभा के समस्याओं को लेकर अबतक जितने भी आवाज उठाई हैं, उनमें से एक भी समस्या पर सरकार ने पहल नहीं की है। अभी हाल ही में मानसून सत्र के दौरान सांसद सेठ ने केंद्र सरकार से चांडिल डैम परियोजना की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है लेकिन इस मांग पर केंद्र सरकार कितना गंभीर है? आने वाले समय में पता चलेगा।

समाधान केंद्र में नहीं होता है “समाधान”

सांसद संजय सेठ द्वारा रांची लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कई प्रमुख जगहों पर समाधान केंद्र खोला गया है, जहां आम जनता के समस्याओं का समाधान करने की बात कही गई थी। इन समाधान केंद्रों पर पहुंचकर आम जनता अपनी हर समस्या बता सकते हैं और उनके समस्याओं का समाधान पा सकेंगे, ऐसी बातें सांसद संजय सेठ ने स्वयं कहा था लेकिन आज तक कितने समस्याओं का समाधान हुआ? रांची लोकसभा के अन्य विधानसभा की बात नहीं करेंगे। यहां केवल ईचागढ़ विधानसभा की बात करें तो दो समाधान केंद्र खोला गया है। पहला समाधान केंद्र पूर्व विधायक स्वर्गीय साधुचरण महतो के आवास पर खोला गया है। दूसरा केंद्र चौका मोड़ पर खोला गया है। इन दोनों ही जगहों पर बड़े बड़े बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें बड़े बड़े अक्षरों में समाधान केंद्र लिखा हुआ है लेकिन आम जनता के समस्याओं का एक भी “समाधान”नहीं होता है। यहां केवल भाजपा की सांगठनिक बैठक और कार्यक्रम होते हैं।

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