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झारखंड : रघुवर सरकार में बगैर खनन चालान भेजे 251 रैक

1000 करोड़ रुपये से अधिक अवैध खनन में प्रेम प्रकाश, पंकज मिश्रा, कोलकाता के व्यवसायी संजय चौधरी व अमित अग्रवाल के मिलीभगत का दावा

डेस्क : झारखंड में अवैध खनन मामले में हर रोज नया मोड़ ले रहा है। अभी जांच चल ही रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि रघुवर सरकार के समय प्रेम प्रकाश की कंपनी ने बिना चालान के 233 रेलवे रैक में स्टोन चिप्स भेजे थे। प्रवर्तन निदेशालय ने अपने चार्जशीट में बताया है कि 1000 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध खनन में प्रेम प्रकाश, पंकज मिश्रा(सीएम हेमंत सोरेन के पीए) कोलकाता के व्यवसायी संजय चौधरी व अमित अग्रवाल की मिलीभगत है।

बताया गया है कि सीटीएस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (U24117WB2003PLC111345) जहां संजय चौधरी निदेशकों में से एक हैं। लंबे समय से वांछित खनन चालान के बिना रेलवे के माध्यम से स्टोन चिप्स के परिवहन में शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने बीएससीआई, एसवीवाईई, एडीटीजी और कुछ अन्य कंपनियों को भी नामित किया है। जिन्हें सीटीएस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी कहा जाता है।

प्रवर्तन निदेशालय ने साहिबगंज के समीप स्थित बिहार के पीरपैंती रेलवे स्टेशन से वित्त वर्ष 2015-16 से 2022-23 के दौरान सीटीएस इंडस्ट्रीज और अन्य द्वारा किये गए रेलवे के माध्यम से स्टोन चिप्स के ढुलाई का विवरण प्रस्तुत किया है। प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि इस अवधि के दौरान सीटीएस इंडस्ट्रीज और अन्य ने स्टोन चिप्स के परिवहन के लिए 268 रेलवे रैक बुक किये। उनमें से 251 रैक बिना खनन चालान के भेजे गए। यह रघुवर दास के कार्यकाल के दौरान हुआ। रघुवर दास दिसंबर 2014 से दिसंबर 2019 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।

2018 – 19 में सबसे अधिक 117 रैक बुक किए गए

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक सीटीएस इंडस्ट्रीज और अन्य ने 233 रेलवे रैक में स्टोन चिप्स भेजे। उनमें किसी का भी कोई खनन चालान नहीं था। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सबसे अधिक 117 रैक बुक किये गए। उनमें किसी का भी कोई खनन चालान नहीं था। वहीं, 2015-16 के दौरान सीटीएस इंडस्ट्रीज और बीएससीआई द्वारा कुल 16 रैक बुक किये गए थे। वहीं, बगैर खनन चालान के स्टोन चिप्स भेजे गए थे।

आश्चर्यजनक तथ्य सामने आ रही हैं कि अगले वित्तीय वर्ष में सीटीएस इंडस्ट्रीज द्वारा केवल एक रैक बुक किया गया था और उसका कोई खनन चालान नहीं था। वित्तीय वर्ष 2017-18 में, सीटीएस इंडस्ट्रीज ने एडीटीजी के साथ मिलकर 31 रैक बुक किए और भेजे। वित्तीय वर्ष 2019-20 में सीटीएस इंडस्ट्रीज और एसवीवाईई के नाम से 68 रैक बुक थी। इस तरह की अनियमितता एयर अवैध कारोबार से सरकार को 100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा है।

प्रेम प्रकाश ने अवैध गतिविधियों और बाहरी उद्देश्यों के लिए अपनी राजनीतिक निकटता का उपयोग किया

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि प्रेम प्रकाश और संजय चौधरी का एक साथ मिलकर अवैध खनन का कारोबार कर रहा था। जांच में यह खुलासा हुआ है कि प्रेम प्रकाश को संजय चौधरी से कई करोड़ रुपये मिले थे। प्रेम प्रकाश के अवैध खनन के सहयोगी पंकज मिश्रा और अन्य लोगों से हाथ मिला लिया गया था। अवैध खनन की आय के रूप में बहुत रुपये प्राप्त हुआ। जिसका उपयोग उन्होंने व्यक्तिगत लाभ के लिए किया।

बताया गया है कि प्रेम प्रकाश ने अवैध गतिविधियों और बाहरी उद्देश्यों के लिए अपनी राजनीतिक निकटता और दबदबे का उपयोग किया। प्रेम प्रकाश ने प्रशासन को भी प्रभावित किया। स्वाभाविक है राजनीतिक व सत्तापक्ष की निकटता के कारण प्रेम प्रकाश पर राज्य सरकार की प्रशासन भी उसके गिरेबान पर हाथ डालने की हिमाकत नहीं की।

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