Image default
JamshedpurJharkhand

जमशेदपुर : मंत्री बन्ना गुप्ता के ड्रीम प्रोजेक्ट आरती घाट पर आदिवासी – मूलवासी समाज ने जताई आपत्ति, कहा – ऐतिहासिक दोमुहानी टुसू घाट का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं

जमशेदपुर : सुवर्णरेखा दोमुहानी घाट पर पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन तथा टाटा स्टील द्वारा सौंदर्यीकरण कार्य तथा आरती घाट तैयार किया जा रहा है, जिसकी अगुवाई स्वयं सूबे के स्वास्थ्य मंत्री तथा जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक बन्ना गुप्ता कर रहे हैं। जिस दोमुहानी घाट को आरती घाट के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिसमें तकरीबन 50 – 60 करोड़ रुपये की सरकारी राशि खर्च की जा रही हैं। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है, क्योंकि उक्त दोमुहानी घाट ऐतिहासिक रूप से टुसू घाट के लिए जाना जाता है। जहां मकर संक्रांति पर प्रत्येक वर्ष टुसू पर्व का आयोजन होता है। वहीं, हजारों की संख्या में लोग मकर संक्रांति में डुबकी लगाने पहुंचते हैं।

बता दें कि बीते दिनों आदिवासी – मूलवासी समाज के लोगों ने दोमुहानी घाट पर एक बोर्ड लगाई है और आरती घाट नामकरण पर आपत्ति जताई है। वहां लगाए गए बोर्ड में प्रचीन टुसू घाट, दोमुहानी सोनारी लिखा हुआ है।

इस विषय पर संयुक्त ग्राम सभा मंच के अनूप महतो ने कहा कि मंत्री बन्ना गुप्ता की सहयोगी बनकर पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन तथा टाटा स्टील प्रबंधन हमारे झारखंडी संस्कृति और परंपरा पर प्रहार कर रही हैं और हमारे ऐतिहासिक टुसू घाट पर अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्या हम आदिवासी – मूलवासी समाज के जल – जंगल – जमीन, धार्मिक स्थल, सांस्कृतिक धरोहर पर अतिक्रमण से ही कुछ विशेष लोगों का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा होता है? अब तक जो होते आया है और होने का संभावना दिख रहा है, उससे तो यही लग रहा है कि हमारे सांस्कृतिक धरोहर पर सुनहरा हमला जारी है।सुवर्णरेखा नदी के (सोनारी),(डोबो), (सांपड़ा) दोमुहानी नदी घाट हमारे पीढ़ी दर पीढ़ी का सांस्कृतिक धरोहर है जो खरकाई व सुवर्णरेखा नदी का संगम स्थल भी है। वहां बीचो बीच एक पत्थर है जो हमारा धार्मिक स्थल है, साल के एक दिन आखईन जतरा में स्थानीय खतियान धारियों द्वारा पूजा, बलि प्रतिष्ठा किया जाता है। वहीं, लाया द्वारा आखईन जतरा से एक दिन पहले टुसू परब के दिन टुसू परब मनाया जाता है। जहां प्राचीन मेला लगता है।

अनूप महतो ने कहा कि हमारे सांस्कृतिक धरोहर टुसू परब घाट को आरती घाट के नाम से क्यों मंत्री बन्ना गुप्ता संबोधित कर रहे हैं? किसी एक धर्म के नाम से अतिक्रमण करना कहां तक उचित है? बनारस का संस्कृति झारखंड में क्यों थोपने का प्रयास किया जा रहा है? किसी समुदाय को अगर बुनियाद से समाप्त करना हो तो उसके भाषा संस्कृति को समाप्त कर दो वह खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगे। हमारे दोमुहानी प्राचीन टूसु घाट में सभी का सम्मान व स्वागत है। किंतु बाहरी संस्कृति द्वारा अतिक्रमण बर्दाश्त किया नहीं जाएगा। अनूप महतो ने कहा कि क्या इस योजना को लेकर सुवर्णरेखा परियोजना से एनओसी दिया गया है? गैर झारखंडी संस्कृति आरती घाट के उद्देश्य को लेकर जो घाट का निर्माण हो रहा है, वहां प्रशासन द्वारा किस आधार पर किसी एक धर्म के नाम पर फंड खर्च किया जा रहा है?

उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य का पहचान मिले आज 22 साल से अधिक हो गई है, किंतु दुर्भाग्य की बात है अभी तक झारखंडी संस्कृति को संरक्षण देने वाली कोई नीति नहीं बन पाई। इसके चलते आज झारखंडी संस्कृति पर सुनहरा हमला जारी है और झारखंडी संस्कृति हाशिए पर खड़ी है। सौंदर्यीकरण के नाम पर नदी घाटों का नियमित साफ सफाई होनी चाहिए थी, किंतु धर्म विशेष के पूजा में साफ सफाई करवाना पक्षपाती है। टुसू परब, करम परब, जितिया परब आदि के अवसर पर नदी घाटों का सफाई नहीं होती है। सरकार और प्रशासन एक आंख में सुरमा एक आंख में काजल के धर्म का पालन करती हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। धर्म के नाम पर जल – जंगल – जमीन, नाला, नदी घाटों का अतिक्रमण नहीं चलेगा।

अनूप महतो ने कहा कि बाहरी संस्कृति द्वारा अगर इसी तरह अतिक्रमण चलता रहा तो निश्चित तौर पर झारखंडी आंदोलनरत होंगे, जिसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होंगे।

Related posts

रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर, बजाज ऑटो एवं कृष्णा बजाज के संयुक्त तत्वावधान में स्वस्थ वाहन स्वस्थ चालक शिविर आयोजित

admin

रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव एक राजनीतिक संदेश : सुदेश कुमार महतो

admin

चांडिल में अफसरशाही चरम पर, जनप्रतिनिधियों में रोष

admin

Leave a Comment