Image default
JamshedpurJharkhand

जयराम महतो ने पटमदा में शहीद निर्मल महतो के प्रतिमा का अनावरण किया, कहा – निर्मल महतो के हत्या की एएनआई जांच हो, मिले शहीद का दर्जा

जमशेदपुर। अलग राज्य गठन के 22 साल बीत जाने के बाद भी अबतक झारखंड आंदोलन के अगुवा नेता स्वर्गीय निर्मल महतो को शहीद का दर्जा नहीं देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार को अविलंब निर्मल महतो को शहीद का दर्जा देते हुए उनका सम्मान करना चाहिए। निर्मल महतो ने अलग झारखंड राज्य के लिए अपने प्राणों की आहुति देने का काम किया है, ऐसे में उनका सम्मान सर्वोपरि है। उनका सम्मान राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उक्त बातें झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयराम महतो ने कहा है। शहीद निर्मल महतो के 36वें शहादत दिवस के अवसर पर जयराम महतो पटमदा में बोल रहे थे। जयराम महतो ने निर्मल महतो के हत्या की जांच ए एन आई से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य के इतने बड़े नेता की हत्या की गुत्थी आज भी सुलझी नहीं है। हत्याकांड को अंजाम देने वालों की गिरफ्तारी से झारखंड की जनता संतुष्ट नहीं है, जनता हत्या के सूत्रधारों को जानना चाहती हैं। जयराम महतो ने कहा कि शहीदों के सपनों का झारखंड बनाने के लिए हर चुनौतियों से टकराने के लिए राज्य के युवा तैयार है। शहीद निर्मल महतो के विचार, आदर्श, साहस एवं मूल्य को जीवित रखना हर झारखंडी का कर्तव्य है, खासकर युवाओं की जिम्मेदारी है।

झारखंडियों के उन्नति और खुशहाली के लिए निर्मल महतो ने किया था संघर्ष : विश्वनाथ महतो

झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के सक्रिय सदस्य सह छात्र नेता विश्वनाथ महतो ने कहा कि केवल अलग झारखंड राज्य हासिल करने के लिए शहीद निर्मल महतो ने संघर्ष नहीं किया था। उनका सपना था कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद यहां को लोगों का कल्याण हो। निर्मल महतो ने झारखंडियों के उन्नति और खुशहाली के लिए संघर्ष किया था और इस संघर्ष की कड़ी में उनकी हत्या कर दी गई। निर्मल महतो चाहते थे कि अलग झारखंड के निवासियों को हर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले। यहां के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, रोगियों को मुफ्त इलाज मिले, बेरोजगार युवाओं के हाथों को काम मिले। परंतु सत्तालोलुप लोगों ने निर्मल महतो के सपनों को चूर चूर कर दिया है। अब युवाओं को आगे आना होगा, सक्रिय राजनीति में भाग लेकर राज्य की दिशा और दशा को बदलने के लिए संघर्ष करना होगा।

बनडीह मोड़ तथा चड़कपाथर में जयराम ने किया निर्मल महतो का प्रतिमा अनावरण

आज पूरे झारखंड समेत पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रस्तावित वृहद झारखंड के क्षेत्रों में अलग झारखंड आंदोलन के क्रांतिकारी नेता शहीद निर्मल महतो को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। झारखंड आंदोलन के अगुवा नेता शहीद निर्मल महतो के शहादत दिवस के अवसर एक तरफ जहां विभिन्न राजनीतिक दलों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, कई जगहों पर शहीद निर्मल महतो की नई प्रतिमा स्थापित किया गया। निर्मल महतो के 36वीं शहादत दिवस के अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत दो जगहों पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।
इस अवसर पर झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयराम महतो ने दोनों पटमदा के ओड़िया पंचायत अंतर्गत बनडीह मोड़ तथा कमलपुर पंचायत के चड़कपाथर में स्थापित निर्मल महतो के प्रतिमा का अनावरण किया। वहीं, माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित की।

झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के सदस्यों द्वारा उक्त दोनों स्थानों पर प्रतिमा स्थापित करने तथा शहादत दिवस पर प्रतिमा का अनावरण करने की तैयारी की गई थी। करीब एक माह पहले से इसकी तैयारी की जा रही थी। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समिति के सदस्यों द्वारा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में जन जागरण अभियान चलाया गया था।

पटमदा में दो प्रतिमा का अनावरण करने के पश्चात बाइक जुलूस की शक्ल में जयराम महतो के नेतृत्व में समिति के सैकड़ों सदस्य जमशेदपुर के उलियान रवाना हुए, जहां शहीद निर्मल महतो के बेदी पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने शहीद निर्मल महतो अमर रहें, जय झारखंड, झारखंड के तमाम शहीद अमर रहें आदि के नारे लगाए।


इस मौके पर मौके पर मोतीलाल महतो, जिला परिषद खगेन महतो, माणिक चंद्र बेसरा, तपन महतो, विश्वनाथ महतो, चंदन महतो, दया सागर महतो, बंकिम महतो, पिंटू महतो, पबित्र महतो, बुध्देश्वर महतो, उत्तम महतो, परान महतो, उत्तम महतो, फूल चाँद महतो, भैरव महतो, निमाई महतो, बसुदेब, गुरुपद मांडी, मनोज, गुणधर, साहेब राम, मधुसूदन, अजित, सुजीत, कृष्णापद, संटू, सुभाष, चित्त महतो, कौशिक, कार्तिक, संजय, सिद्धारत, बिष्णु, बिजय, सहदेब, बनमाली, शंकर, सुब्रत, प्रताप, असित, जयदेव, गौतम, गौरांग, कृतिबास, स्वपन, हीरालाल, गणेश कुम्भकार, बाबलु, महेश्वर, संतोष, निर्मल, बिकाश, प्रह्लाद, संजीव, चरण, हिमांशु, शैलेंद्र, भबतारण आदि शामिल थे।

Related posts

झारखंड : आदमखोर तेंदुआ, अबतक चार बच्चों की ले चुका जान, अब होगा ‘एनकाउंटर’

admin

ईचागढ़ में हुई आजसू बुद्धिजीवी मंच की बैठक

admin

सराहनीय कार्य : 9 महीनों से दिव्यांग को नहीं मिल रहा था पेंशन, रंग लाया पंसस प्रतिनिधि का प्रयास

admin

Leave a Comment