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चांडिल डैम के विस्थापितों ने विकास भवन कार्यालय में भरी हुंकार, चीफ इंजीनियर, एडी समेत तमाम अधिकारियों के कार्यालय को किया सील

सरायकेला – खरसावां : अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले चांडिल डैम के 84 मौजा 116 गांव के सैकड़ों विस्थापितों ने आज आदित्यपुर स्थित विकास भवन कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। विस्थापितों ने कार्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया। वहीं, सुवर्णरेखा बहुउद्देश्यीय परियोजना के अधिकारियों के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी।

बता दें कि अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले चांडिल डैम के विस्थापित चांडिल अंचल सह पुनर्वास कार्यालय में बीते 16 दिन से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हैं। वहीं, पिछले दिनों पुनर्वास कार्यालय के गेट पर तालाबंदी किया गया था। इधर, 129 दिन से गोविंदपुर खीरी निवासी विस्थापित मनोहर महतो आदित्यपुर विकास भवन पुनर्वास कार्यालय के सामने धरना पर बैठे हैं। लेकिन अबतक विभागीय अधिकारियों की ओर किसी तरह का ठोस पहल नहीं होने से विस्थापित आक्रोशित हैं।

विस्थापितों ने चीफ इंजीनियर, एसडी समेत तमाम पदाधिकारियों के कार्यालय को किया सील

अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले चांडिल डैम 84 मौजा 116 गांव के महिला प्रतिनिधि मंडल ने विकास भवन कार्यालय के चीफ इंजीनियर चांडिल कॉम्प्लेक्स, जमशेदपुर के कार्यालय, अपर निदेशक रंजना मिश्रा के कार्यालय, सहायक प्रशाखा पदाधिकारी धर्मवीर कुमार, मुख्य अभियंता का कार्यालय चांडिल कंपलेक्स, जमशेदपुर तथा अपर निदेशक कार्यालय भू अर्जन एवं पुनर्वास स्वर्णरेखा परियोजना आदित्यपुर आदि के कार्यालय के गेट पर तालाबंदी कर दी। वहीं, तालों को सील कर दिया है। विस्थापितों के आंदोलन को देखते हुए तमाम पदाधिकारी भी अपने कार्यालय से गायब हैं।

अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के संस्थापक सदस्य राकेश रंजन महतो ने कहा कि अब विस्थापित आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना चुकी हैं। इस बार विस्थापित अपनी लड़ाई चरणबद्ध तरीके से लड़ रहे हैं। यह लड़ाई अंतिम लड़ाई होगी, जो आर पार की लड़ाई होगी। राकेश रंजन महतो ने बताया कि 16 जून से अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इस बीच प्रथम चरण में पुनर्वास कार्यालय का एक दिवसीय गेट जाम किया गया। आज आंदोलन के दूसरे चरण के तहत आदित्यपुर कार्यालय का गेट जाम तथा तालाबंदी का कार्यक्रम है।

आंदोलन का तीसरा चरण 5 जुलाई को है, जिसमें ईचागढ़ विधायक सविता महतो तथा जल संसाधन विभाग के मंत्री, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा। वहीं, चांडिल पुनर्वास कार्यालय धरना स्थल से चांडिल बांध तक विस्थापित महारैली का कार्यक्रम रखा गया है। यदि इसके बाद भी सरकार हम विस्थापितों के साथ न्याय नहीं करती हैं तो उग्र आंदोलन का रुख अपनाया जाएगा।

राकेश रंजन महतो ने बताया कि अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच दस सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रही हैं। बताया कि हमारी मांग है कि चांडिल डैम के पूर्ण एवं आंशिक रूप से 116 विस्थापित गाँवो का भूर्जन वर्ष 2001 तक सम्पन्न किया जा चुका है, परन्तु अभी तक पूर्ण नियोजन प्राप्त नही हुआ है, अत: विकासपुस्तिका में अंकितनुसार प्रत्येक विस्थापित परिवार को सरकारी नौकरी दिया जाए।


अथवा उच्चतम न्यायालय द्वारा 8 फरवरी 2017 को मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना के प्रत्येक विस्थापित परिवार के लिए 60 लाख रूपये मुआवजा देने के आदेश के तर्ज पर चांडिल डैम विस्थापितों को 1 करोड़ मुआवजा दिया जाए। 1990 के पूर्नवास नीति के अनुसार सभी विस्थापितों को पूनर्वास के लिए 25 डिसमिल भूखंड दिया जाना था, पर पुनरीक्षित पुनर्वास नीति 2012 के प्रावधानों (कंडिका-5.1 (क) के मुताबिक, अब 12.5 डिसमिल दिया जाना है। जिसे पुन: 25 डिसमिल किया जाए।

सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना चांडिल डैम विस्थापितों को पुनरीक्षित पुनर्वास नीति 2012 को आधार मानकर दिशा निर्देश पालन किया जाता है। अत: 2012 वर्ष को आधार मानकर भूअर्जन अधिनियम की धारा-4 के अंतर्गत विकास पुस्तिका में अंकित सदस्यों का उम्र 2012 तक 18 वर्ष पूर्ण होने वाले सभी सदस्यों का नाम विकास पुस्तिका निर्गत किया जाए।

डैम प्रबंधन द्वारा जमीन अधिग्रहण करके आज 40 वर्ष हो रहे हैं, कई विकास पुस्तिका में परिवार प्रमुख का मृत्यु हो चुका है। अतः उक्त विकास पुस्तिका के आश्रितों के नाम विकास पुस्तिका निर्गत किया जाए। पुनर्वास का समस्या ज्यों का त्यों बना हुआ है। अतः 116 गांवों का ही पूर्नवास सुविधायें पुनरीक्षित पुनर्वास नीति 2012 के प्रावधानों (कंडिका 5.5 ) के अनुसार मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराया जाए एवं पुनर्वास स्थल पर बसे हुए विस्थापितों के नाम जमीन का पट्टा दिया जाए।

डैम द्वारा विस्थापन के बदले दिया गया नौकरी, निर्गत किया गया विकास पुस्तिका, निर्गत किया गया पुनर्वास पैकेज तथा पुनर्वास स्थल पर अधिग्रहण किए गए प्लॉट का CBI जांच हो। 28 सितंबर 2022 को चांडिल पुनर्वास कार्यालय के समक्ष अनशन के दौरान ट्रैक्टर द्वारा कुचले जाने से घायल हुए व्यक्तियों को मुआवजा तथा नौकरी दिया जाए। हमारी (विस्थापितों की) वार्ता सार्वजनिक रूप से 116 गांव के प्रतिनिधिमंडल के साथ सिर्फ केंद्रीय टीम अथवा केंद्रीय जल संसाधन विभाग के साथ ही किया जाए।

चांडिल डैम के माध्यम से सृजित होने वाले हर योजना, रोजगार और लाभ का पहला अधिकार चांडिल डैम विस्थापित को प्राप्त होना चाहिए। जब तक हमारी मांग को पूरा नहीं किया जाता है, तब तक डैम का जल
भंडारण 177 मीटर रखा जाए तथा 177 मीटर तक जलस्तर बढ़ाने से पहले डूबा क्षेत्र में प्रशासनिक जन सूचना जारी हो।


आज तालाबंदी आंदोलन में राकेश रंजन महतो, अनूप महतो(मुरु ), अनूप महतो (दयापुर), विवेक सिंह, आस्तिक महतो, विष्णु पद महतो, सीताराम महतो, अरुण धीवर, मुगल गोप, गोपेश महतो, बाबूलाल गोप, नारद महतो, विधु वाला महतो, गीता रानी महतो, मुन्नीदेवी महतो, प्रतिमा महतो, जगबंधु धीवर, अशोका महतो, माधुरी महतो, निदेश मुर्मू, सुमित्रा महतो, भानुमति महतो, ठाकुर दास महतो, रोमनी महतो, रविवारी महतो, लोधी वाला महतो समेत सैकड़ों विस्थापित मौजूद हैं।

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