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चांडिल : आदिवासियों ने मोटरसाइकिल जुलूस निकालकर किया समान नागरिक संहिता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

सरायकेला – खरसावां । संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास से हूल दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आदिवासियों ने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में स्थापित शहीदों के प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित की। इस अवसर पर विशाल मोटरसाइकिल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस केंद्र सरकार के समान नागरिक संहिता कानून के विरोध में था।

मोटरसाइकिल जुलूस कपाली के कमारगोड़ा शहीद बिरसा मुंडा सेतु से प्रारंभ होकर पूड़ीसिली स्थित शहीद गंगानारायण सिंह चौक, कांदरबेड़ा चौक से होते हुए चांडिल गोलचक्कर सिदो कान्हू चौक पहुंची, यहां से जुलूस चौका होते हुए ईचागढ़ प्रखंड के पातकोम रोड से गौरांगकोचा के शहीद फूलो – झानो चौक पहुंची। पूरे जुलूस के दौरान जगह – जगह शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान सभी के हाथों में पारंपरिक हथियार भी थे। वहीं, जुलूस गौरांगकोचा पहुंचकर जनसभा में तब्दील हो गई। जनसभा को आदिवासियों के अगुवा नेताओं ने संबोधित किया और समान नागरिक संहिता कानून का पुरजोर विरोध किया।


इस अवसर पर संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन के प्रवक्ता सुधीर किस्कू ने कहा कि समान नागरिकता संहिता कानून आदिवासी समाज के लिए गले का फंदा है। यह कानून लागू होने से आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व ही मीट जाएगी। आदिवासी समाज के मूल पहचान खत्म हो जाएगी। आदिवासी समाज की कास्टोमरी लॉ खत्म हो जाएगी। किस्कू ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी अस्तित्व को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएगी। संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल समान नागरिक संहिता कानून का विरोध आगे गांव गांव तक ले जाएगी और भारी विरोध करेगी।

संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन के मानिक सिंह सरदार ने कहा कि आदिवासी समाज अपने हक अधिकार, पहचान, इतिहास को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी कीमत पर हम अपनी इतिहास, अधिकार, पहचान को मिटने नही देंगे। उन्होंने आगे कहा कि समान नागरिक संहिता कानून आदिवासी समाज के लिए एक काला कानून है। इसे आदिवासी समाज हर हाल में विफल करेगी। इस कानून से आदिवासी समाज के लिए बने विशेष कानून सीएनटी/एसपीटी एक्ट, पेसा एक्ट, पांचवी अनुसूची और छठी अनुसूची खत्म हो जाएगी। आदिवासी समाज का आरक्षण खत्म हो जाएगा।

इस मौके पर श्यामल मार्डी, पारगाना रामेश्वर बेसरा, श्याम सिंह सरदार, सुखराम हेंब्रम, चारुचंद किस्कू, रविंदर सरदार, जगदीश सिंह सरदार, भद्रु सिंह सरदार, लक्षण सिंह, सुरेंदर सिंह ज्योतीलाल बेसरा, धनेश्वर मुर्मू, भादूडीह माझी बाबा बुद्धेश्वर मार्डी, डोमन बासके, प्रकाश मार्डी, जगन्नाथ किस्कू, रवींद्रनाथ सिंह, बधुसूदन हेंब्रम समेत सैकड़ों आदिवासी युवा मौजूद थे।

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