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चांडिल : सांसद पर सवाल खड़े करने पर संगठन सर्वोपरि का दम्भ भरने वाली भाजपा ने अपने ही पदाधिकारी को भेजा नोटिस

सरायकेला – खरसावां । बीते दिनों रांची लोकसभा के सांसद संजय सेठ ईचागढ़ विधानसभा के दौरे पर थे। इस दौरान सांसद संजय सेठ चांडिल बाजार में अपने सांसद प्रतिनिधि विशाल चौधरी के आवास पर रात्रि विश्राम किए। अगले दिन सुबह सांसद सेठ चांडिल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण कर रहे थे कि इस दौरान भाजपा मंत्री (चांडिल मध्य भाग) लालमोहन सिंह उर्फ साहेब सिंह समेत चांडिल के नागरिकों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। साहेब सिंह के नेतृत्व में लोगों ने सांसद संजय सेठ से चांडिल बाजार के सड़क, नाली, बिजली, स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बताया तथा इन समस्याओं के समाधान के लिए सांसद पर दबाव बनाने का प्रयास किया। सांसद संजय सेठ स्पष्ट रूप से लोगों के सवालों के जबाव नहीं दे पाए। आनन फानन में हमेशा की तरह सांसद सेठ फिर से लोगों को आश्वासन देकर वहां से जल्दबाजी में निकल पड़े। इसके बाद कुछ लोगों ने वीडियो और फोटो लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सोशल मीडिया पर सांसद सेठ की खूब किरकिरी हुई, सांसद सेठ चांडिल बाजार में आलोचना का विषय बन गए।

सांसद के किरकिरी व आलोचना के सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि भाजपा मंत्री साहेब सिंह ही हैं। बस फिर क्या, भाजपा के वरीय नेताओं के निर्देश पर भाजपा मंडल अध्यक्ष खगेन महतो ने साहेब सिंह को नोटिस भेज दी। नोटिस भेजकर साहेब सिंह को जबाव तलब किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि आप किन कारणों से लगातार संगठन की बैठकों में अनुपस्थित रह रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया में संगठन और सांसद जी के ऊपर ओछी टिप्पणी किए जाने पर संगठन द्वारा आप पर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाय? तीन दिनों के अंदर जबाव दें, अन्यथा संगठन आपके ऊपर उचित कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।


यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर भाजपा मंत्री साहेब सिंह की क्या गलती है? क्या अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आवाज उठाना पार्टी विरोधी कार्य हैं? क्या अपने ही क्षेत्र के सांसद के समक्ष सवाल खड़े करना अपराध है? आखिर साहेब सिंह जैसे हजारों कार्यकर्ता ही है जो चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने मतदाताओं के दरवाजे पर जाते हैं। न जाने कितने कार्यकर्ता ही हैं जो सोशल मीडिया और चौक चौराहे पर अपने पार्टी और पार्टी के नेताओं का प्रचार प्रसार करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य ही है जो अपने ही क्षेत्र के समस्याओं को लेकर अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल खड़े करने वालों को पार्टी की ओर से कार्रवाई की धमकी दी जाती हैं।


जबकि, भाजपा के नेता और कार्यकर्ता अपने संगठन को विश्व की सबसे बड़ी संगठन मानते हैं। वहीं, संगठन में पारदर्शिता रखने का दावा करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि भाजपा के नेतागण अपने संगठन को अनुशासित संगठन मानती हैं। भाजपा के नेता बड़े बड़े जनसभाओं में संगठन सर्वोपरि का दम्भ भरते हैं और कार्यकर्ताओं की पीठ थपथपाते नहीं थकते हैं। शायद यह सभी बातें विरोधी दलों को नीचा दिखाने की एक रणनीति हो सकती हैं या फिर अपने कार्यकर्ताओं के जोश को वोट बैंक में डायवर्ट करने की रणनीति है? ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि जब संगठन सर्वोपरि का दम्भ भरने वाली संगठन स्वयं अपने पार्टी के पदाधिकारियों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की धमकी देने लगे तो आप क्या कहेंगे? जबकि, यहां मामला पार्टी विरोधी नहीं, बल्कि अपने ही क्षेत्र के समस्याओं को लेकर अपने जनप्रतिनिधि से सवाल खड़े करने का मामला है।

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