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चांडिल : अपमानित होने से बच गया राष्ट्र ध्वज, बीएड कॉलेज में झंडोत्तोलन करने को लेकर हुई छीना झपटी, जानें पूरा मामला

सरायकेला – खरसावां। जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत लुपुंगडीह स्थित आशु किस्कू एंड रवि किस्कू टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (बीएड कॉलेज) में झंडोत्तोलन के दौरान दो पक्ष में विवाद हो गया। झंडोत्तोलन को लेकर सीएम हेमंत सोरेन के मामा और एक महिला के बीच छीना झपटी हो गई। सौभाग्य से राष्ट्र ध्वज तिरंगा अपमानित होने से बच गया। दरअसल 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन के मामा गुरुचरण किस्कू बीएड कॉलेज में झंडोत्तोलन कर रहे थे कि इसी दौरान अचानक से एक महिला ने झंडे की डोर को पकड़ लिया और खींचने का प्रयास किया। इस बीच बीएड कॉलेज प्रबंधन के उपाध्यक्ष संजय मुखर्जी ने महिला को रोकने का प्रयास किया। अंततः सीएम के मामा गुरुचरण किस्कू तथा उक्त महिला ने संयुक्त रूप से झंडोत्तोलन किया। झंडोत्तोलन के बाद राष्ट्रगान हुआ। सीएम के मामा गुरुचरण किस्कू को झंडोत्तोलन करने से रोकने का प्रयास करने वाली महिला का नाम नमिता महतो बताया जा रहा है।

सीएम हेमंत सोरेन के मामा गुरुचरण किस्कू आशु किस्कू एंड रवि किस्कू टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के बोर्ड अध्यक्ष हैं। हर साल की भांति इस साल भी बोर्ड अध्यक्ष होने के नाते गुरुचरण किस्कू झंडोत्तोलन करने पहुंचे थे। तिरंगा फहराने की सारी व्यवस्था हो चुकी थी। सभी की उपस्थिति में गुरुचरण किस्कू ने झंडोत्तोलन करना शुरू किया था कि इसी दौरान वहां सामने खड़ी एक महिला अचानक बेदी पर चढ़ गई। महिला जबरन झंडोत्तोलन करने का प्रयास करती हैं। उक्त महिला ने गुरुचरण किस्कू के हाथ से तिरंगे की डोर को जबरन खींचकर अपने हाथों में लेने का प्रयास किया। इस बीच दोनों ही डोर को पकड़कर खींचने लगे, जिससे कभी भी डोर टूट सकती थी और झंडोत्तोलन से पहले ही तिरंगा जमीन पर गिर जाता। लेकिन डोर टूटने की आशंका जताते हुए वहां पर मौजूद कॉलेज के बोर्ड उपाध्यक्ष संजय मुखर्जी बेदी तक आते हैं और महिला को वहां से हटाने का प्रयास करते हैं। इस दौरान संजय मुखर्जी महिला से कहते हैं “आप छोड़िए न दादा कर रहे हैं तो, दादा कर रहे हैं न”। इतने में वहां खड़े किसी व्यक्ति ने कहा ” अच्छा ठीक है दोनों ही डोर को पकड़ें न ” जिसके बाद झंडोत्तोलन किया गया। वहीं, तिरंगे को सलामी दी गई और राष्ट्रगान गाया गया। यह सबकुछ कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा छात्रों के सामने हुई। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसके कारण मामला चर्चा में है। फिलहाल इस मामले को लेकर कॉलेज प्रबंधन ने कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया है।

दअरसल, नीमडीह के लुपुंगडीह स्थित आशु किस्कू एंड रवि किस्कू टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर (बीएड कॉलेज) शुरू से विवादों में रहा है। इन दिनों कॉलेज के बोर्ड कमेटी में दो पक्षों के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही हैं। एक पक्ष में जयराम हैं तो दूसरे पक्ष में जगदीश महतो हैं। कॉलेज स्थापना के समय से ही दोनों स्वयं को बोर्ड के सचिव होने का दावा करते हैं लेकिन आजतक निर्णय नहीं हो पाया है कि कॉलेज के वास्तविक सचिव कौन हैं। इसके चलते आज भी विवाद खड़ा है। बताया जाता है कि झंडोत्तोलन में अड़चन डालने का प्रयास करने वाली महिला नमिता महतो – जगदीश महतो की धर्मपत्नी हैं। कॉलेज प्रबंधन के जगदीश महतो के खिलाफ नीमडीह, चांडिल समेत अन्य थानों में कई मामले दर्ज हैं। वह जेल भी जा चुका है। वहीं, एक समय पर उक्त कॉलेज द्वारा छात्रों को फर्जी सर्टिफिकेट दिए जाने का भी आरोप लग चुका है। प्रबंधन के विवाद के कारण अधिकांश समय कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो पाती हैं। कोरोनाकाल की समाप्ति के बाद कॉलेज में काम करने वाले शिक्षकों को वेतन देने में भी घपला करने का मामले सामने आया था। उस समय शिक्षकों ने प्रशासन की मदद ली थी, तब जाकर उन्हें वेतन मिला था। इस कॉलेज में प्रबंधन के आपसी झगड़े पूरे चांडिल और नीमडीह में हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है। कथित तौर पर एक बार कॉलेज परिसर में प्रबंधन के एक पक्ष द्वारा गुंडे बुलाकर दूसरे पक्ष के ऊपर मारपीट करवाने की चर्चा थी।

नीमडीह और चांडिल के लोगों का कहना है कि बीएड कॉलेज प्रबंधन के आपस की लड़ाई के कारण छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ता है। उन छात्रों के भविष्य का क्या होगा जो मोटी रकम खर्च करने के बाद कॉलेज में दाखिल हुए हैं। मामला गंभीर है, क्योंकि अब प्रबंधन की लड़ाई झंडोत्तोलन तक पहुंच चुकी हैं। प्रबंधन के दोनों पक्षों को वर्चस्व कायम रखने का इतना धुन सवार है कि तिरंगे को भी अपमानित करने का दुस्साहस किया गया। यदि थोड़ी सी चूक हो जाती तो बड़ा अनर्थ हो जाता, तिरंगा का अपमान हो जाता। लेकिन प्रबंधन के लोगों को इस बात का जरा सा भी ध्यान नहीं है। भला हो बीएड कॉलेज के बोर्ड उपाध्यक्ष संजय मुखर्जी का, जिन्होंने तिरंगा का अपमान होने से बचा लिया। यदि संजय मुखर्जी महिला को नहीं रोकते तो शायद वह डोर टूट जाती, जिससे तिरंगा जमीन पर गिर जाता।

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