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Seraikela / KharswanSpecial

चांडिल : नक्सल प्रभावित रांका में दो साल बाद भी नहीं पहुंची सरकार, लकड़ी व बांस की पुलिया ग्रामीणों का एकमात्र सहारा

सरायकेला – खरसवां (विश्वरूप पांडा) : झारखंड के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर सड़कों और पुल – पुलिया का जाल बिछाया जा रहा है। बीहड़ जंगल के भीतर पक्की सड़क का निर्माण किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सरायकेला खरसवां जिले के चांडिल प्रखंड में एक ऐसा भी जगह है, जहां सरकार या प्रशासनिक अधिकारी झांकने भी नहीं जाते हैं। इसी जिले के सरायकेला, खरसावां तथा कुचाई के नक्सल प्रभावित गांवों में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। चारों तरफ से गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने का काम हो रहा है। लेकिन विडंबना देखिए कि इसी जिले के हेंसाकोचा पंचायत के ग्रामीण एक अदद छोटी सी पुलिया के लिए तरस रहे हैं। जहां ग्रामीणों को लकड़ी व बांस से बनी पुलिया का सहारा लेना पड़ता है, जिसका निर्माण भी स्वयं ग्रामीणों द्वारा किया गया है।

जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत नक्सल प्रभावित अतिसंवेदनशील सह आदिवासी बहुल क्षेत्र हैंसाकोचा पंचायत के रांका में बांड़सी डूंगरी पुलिया पिछले दो साल पहले क्षतिग्रस्त हुआ था। छोटे से नाले (जुड़िया) में बनी पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के बाद लगातार ग्रामीणों द्वारा बीते दो साल से नए पुलिया निर्माण की मांग की जा रही हैं लेकिन अबतक सरकार या प्रशासन के कान में जूं भी नहीं रेंगी है। इसी नाले से होकर रांगाडीह, पारसीडीह, कोचिया आमड़ा, आमकोचा, जावरदा आदि के ग्रामीण आना जाना करते हैं। चौका थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे चावलीबासा, चौका मार्केट आने जाने के लिए यही पुलिया एकमात्र विकल्प है।

बादल फटने से दो साल पहले क्षतिग्रस्त हो गई थी पुलिया

25 मई 2021 को बादल फटने के कारण भयंकर बाढ़ आई थी। साधारण नाला में भी नदी की तरह पानी बहने के कारण नवनिर्मित पुलिया क्षतिग्रस्त हुआ था। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए मुखिया फंड की राशि से पुलिया के निर्माण कराया गया था। महज चार लाख रुपये की लागत से उक्त पुलिया के निर्माण किया गया था जो बाढ़ की पानी में क्षतिग्रस्त हो गया था। पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से नया पुलिया निर्माण की मांग रखी थी जो अबतक पूरा नहीं हुआ है। अंततः ग्रामीणों ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लकड़ी और बांस से पुलिया निर्माण किया है, जिससे आना जाना कर रहे हैं लेकिन वह जोखिम भरा है। लकड़ी का पुलिया कभी भी गिरकर क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिसमें लोगों की जान भी जा सकती हैं।

बारिश के दिनों में बाहरी दुनिया से कट जाते हैं हजारों ग्रामीण

रांका बांड़सी डूंगरी पुलिया के क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वाहनों का आवागमन तो दूर की बात है। ग्रामीणों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। बारिश के दिनों में इस क्षेत्र के हजारों ग्रामीण बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कट जाते हैं। मुख्य सड़क, अस्पताल, मार्केट आदि से पूरी तरह से संपर्क टूट जाता है। पूरे बरसात के मौसम में यहां के ग्रामीण अपने गांवों में ही सीमित हो जाते हैं, यही इनकी मजबूरी है। हेंसाकोचा पंचायत के रांगाडीह, पारसीडीह, कोचिया आमड़ा, आमकोचा, जावरदा आदि टोला के ग्रामीण इस नाला (जुडिया) से होकर ही आना जाना करते हैं। बारिश के दिनों में इन जगहों के मरीजों को बाहर निकलने की कोई सुविधा नहीं होती हैं। मजबूरन उन्हें जड़ी बूटियों से ही अपना इलाज करना पड़ता है।

विधायक सविता महतो को लिखित मांगपत्र दिया था, कोई पहल नहीं हुआ

हैंसाकोचा के मुखिया प्रतिनिधि कुनाराम मांझी ने बताया कि दो साल जब पुलिया क्षतिग्रस्त हुआ था तो उन्होंने विधायक सविता महतो से मुलाकात कर लिखित मांगपत्र दिया था लेकिन विधायक की ओर से कोई पहल नहीं किया गया। वहीं, बादल फटने के बाद प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट प्रशासन को भी दी गई थी लेकिन प्रशासन ने भी क्षतिग्रस्त पुलिया के निर्माण में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाया है। कुनाराम मांझी ने बताया कि दो दशक से पूर्व के विधायकों समेत जिले के कई अधिकारियों से पुलिया निर्माण की मांग की गई थी लेकिन किसी की ओर से मांग को पूरा करने की पहल नहीं हुई तो अपने मुखिया फंड से ही चार लाख रुपये खर्च कर पुलिया निर्माण करवाया था। पुलिया निर्माण होने के बाद ग्रामीणों को काफी राहत मिली थी लेकिन वर्ष 2021 में बाढ़ के कारण पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई।

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