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JharkhandSeraikela / Kharswan

चांडिल : सात सूत्री मांगों को लेकर सुवर्णरेखा परियोजना के विस्थापित अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन देंगे

16 जून से अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले पुनर्वास कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन

सरायकेला – खरसवां : जिले के चांडिल अनुमंडल में सुवर्णरेखा बहुउद्देश्यीय परियोजना के तहत निर्मित चांडिल डैम से विस्थापित हुए परिवारों को आजतक उनका उचित मुआवजा और अधिकार नहीं मिला है। विस्थापित परिवार दर दर भटक रहे हैं। अपनी पुश्तैनी जमीन देकर जो लोग विस्थापित हुए हैं, उन्हें हितों की बात करने वाला कोई नहीं है। डैम निर्माण के लिए 40 साल पहले चांडिल, नीमडीह, ईचागढ़ तथा कुकडू प्रखंड के विभिन्न मौजा में जमीन अधिग्रहण किया गया था। जमीन के साथ साथ घर बाड़ी खेत खलिहान सबकुछ अधिग्रहण किया गया। इसके बदले में सरकार ने विस्थापित परिवारों को नौकरी, सम्पूर्ण पुनर्वास सुविधा, मुआवजा, बच्चों को शिक्षा, तकनीकी शिक्षा आदि देने की बात कही थी, सरकार की यह बात लिखित दस्तावेज में भी है। पर, दुर्भाग्य की बात है 40 साल बाद भी विस्थापितों को हक़ अधिकार नहीं मिला। वहीं, दूसरी ओर सुवर्णरेखा परियोजना के नाम पर सरकार राशि की लूट हुई, दलालों द्वारा परियोजना को लूट का योजना बना लिया है। सुवर्णरेखा परियोजना के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से योजनाओं में भारी घोटाले किए जा रहे हैं। इधर, डैम के विस्थापित लगातार आंदोलन कर रहे हैं और अपना अधिकार मांग रहे हैं। लेकिन आजतक किसी तरह की स्पष्ट नतीजा नहीं आया है, जिससे विस्थापितों के समस्याओं का समाधान हो सके।

दो महीने बाद विस्थापितों द्वारा अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा। अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के बैनर तले आगामी 16 जून से धरना प्रदर्शन किया जाएगा। धरना प्रदर्शन में हजारों की संख्या में विस्थापित भाग लेंगे। शुक्रवार को अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच की ओर से चांडिल डैम शीश महल में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया था। इस दौरान मंच के संस्थापक सदस्य राकेश महतो ने बताया कि सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा। विस्थापितों की मांग है कि प्रत्येक विस्थापित परिवार को सरकारी नौकरी, सभी विस्थापितों को 25 डिसमिल पुनर्वास भूमि आवंटन हो, वर्ष 2008 तक जिन विस्थापित सदस्यों की उम्र 18 वर्ष है, उनका विकास पुस्तिका निर्गत किया जाय। इसके अलावा मांग है कि विस्थापितों को संपूर्ण पुनर्वास सुविधा उपलब्ध कराया जाय, मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया जाय। राकेश महतो ने कहा कि हमारी सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि जब तक विस्थापितों के सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता है, तब तक चांडिल डैम का जल भंडारण 177 मीटर तक ही रखा जाय। डैम के जलस्तर को बढ़ाने से पहले डूब क्षेत्र में प्रशासनिक सूचना दी जाय।

पिछले साल की घटना पर नहीं हुई जांच, पीड़ितों को नहीं मिला मुआवजा

अखिल झारखंड विस्थापित अधिकार मंच के संस्थापक सदस्य राकेश महतो ने कहा कि पिछले साल चांडिल डैम के विस्थापितों द्वारा पुनर्वास कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन अनशन किया जा रहा था। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर एक ट्रैक्टर घुस आया था। उस दुर्घटना में कई विस्थापित गंभीर रूप से घायल हुए थे, उनमें राकेश महतो भी शामिल हैं। राकेश महतो ने कहा कि उक्त दुर्घटना को लेकर षड्यंत्र की आशंका जताई जा रही हैं कि विस्थापितों के आंदोलन को समाप्त करने के उद्देश्य से जानबूझकर ट्रैक्टर से दुर्घटना को अंजाम दिया गया था। इसको लेकर प्रशासन से घटना की जांच करने की मांग की गई हैं लेकिन आजतक प्रशासन ने किसी तरह की जांच शुरू नहीं किया है। वहीं, दुर्घटना के पीड़ित घायलों को प्रशासन द्वारा किसी तरह का मुआवजा नहीं दिया गया।

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