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JharkhandSeraikela / Kharswan

चांडिल में अफसरशाही चरम पर, जनप्रतिनिधियों में रोष

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने ही कर दिया आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन, प्रमुख को जानकारी भी नहीं

चांडिल : बीते कुछ समय से सरकारी अधिकारियों के कार्यशैली और रवैये से यह प्रतीत हो रहा है कि चांडिल क्षेत्र में अफसरशाही चरम पर है। अधिकारियों के रवैये और कार्यशैली से क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में काफी रोष व्याप्त है। पंचायत के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि चांडिल प्रखंड विकास पदाधिकारी अपने मर्जी के मालिक है। जो मन में आया वही करते हैं। जनप्रतिनिधियों की एक नहीं सुनते हैं। यह जनप्रतिनिधियों का सरासर अपमान है।

दरअसल, मामला यह है कि दो दिन पहले चांडिल के प्रखंड विकास पदाधिकारी मनीष कुमार ने एक नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का स्वयं उद्घाटन किया। चांडिल के डोबो में नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र का प्रखंड विकास पदाधिकारी ने फीता काटकर उद्घाटन कर दिया। जिसके बाद पंचायत के जनप्रतिनिधियों में रोष व्याप्त हो गया है।

बताया जाता है कि आंगनबाड़ी केंद्र के उद्घाटन की सूचना चांडिल प्रखंड प्रमुख अमला मुर्मु को नहीं दी गई थी। इसके कारण वह उद्घाटन में नहीं गई। इससे ज्यादा आश्चर्य होता है कि आंगनबाड़ी केंद्र के उद्घाटन में तमोलिया पंचायत के मुखिया की मौजूदगी में ही प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बड़े ही शानो सौकत के साथ फीता काटकर उद्घाटन कर दिया। इससे भी आश्चर्यजनक बात है कि मुखिया और पूर्व मुखिया से प्रखंड विकास पदाधिकारी का स्वागत भी कराया जाता है। लेकिन, यहां प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा भवन का उद्घाटन करना, इस बात का संकेत है कि यहां अफसरशाही राज कायम है।

जबकि, नियमतः जनप्रतिनिधियों से ही सरकारी योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन कराने का प्रावधान किया गया है। प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन किए जाने की जानकारी मिलने के बाद पंचायत के जनप्रतिनिधियों में काफी रोष व्याप्त है। अब जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों के खिलाफ मोर्चाखोलने की तैयारी है। इसको लेकर प्रमुख, पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड पार्षद द्वारा रणनीति तैयार किया जा रहा है। संभवतः जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री से शिकायत भी किया जा सकता है।

आम जनता के दीर्घा में जनप्रतिनिधियों को बैठाए जाते हैं

कई बार देखने को मिला है कि सरकारी बैठकों, शांति समिति बैठक आदि में पंचायत के जनप्रतिनिधियों को आम जनता के साथ बैठने को कहा जाता है और अधिकारी अलग दीर्घा में बैठते हैं। जबकि, जनप्रतिनिधि सम्मानीय होते हैं और पद में अधिकारियों से बड़े भी हैं। हाल ही में कुछ शांति समिति की बैठकें हुई। जहां अंचलाधिकारी वीआईपी दीर्घा में बैठे थे और प्रमुख तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को जनता के साथ बैठाए गए थे। ऐसे में लोगों के मन में बड़ा सवाल है कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के पद की गरिमा का खयाल नहीं या जानबूझकर ऐसा किया जाता है? या फिर जनप्रतिनिधियों को ही अपने पद और अधिकारों की जानकारी नहीं है।

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