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अधिवक्ता अखिलेश ने टाटा व श्रम आयुक्त को भेजी नोटिस – कर्मचारियों को स्थायी घोषित करें अन्यथा कानूनी कार्यवाही के लिए रहें तैयार

जमशेदपुर : हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने टाटा मोटर्स लिमिटेड और जिला श्रम आयुक्त को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस टाटा मोटर्स के एक अस्थायी कर्मचारी अफसर जावेद के हवाले से भेजी गई हैं।

नोटिस में बताया गया है कि टाटा मोटर्स, पुणे के लगभग 52 अस्थायी कर्मचारियों द्वारा दायर रिट पिटिशन 5588/ 2017 (शंकर भीमराव कदम और अन्य बनाम टाटा मोटर्स और अन्य) तथा अन्य 51 पिटिशनों की सुनवाई के बाद बोम्बे उच्च न्यायालय द्वारा टाटा मोटर्स को दिये गये निर्देशों को जानबूझकर कर टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट के अस्थायी कर्मचारियों के लिए अब तक लागू नहीं करने तथा जिला श्रम आयुक्त की टाटा मोटर्स के मैनेजमेंट के साथ संलिप्तता की वजह से उनके द्वारा उक्त आदेश को लागू कराने में उनकी विफलता के खिलाफ टाटा मोटर्स के एक अस्थायी कर्मचारी अफसर जावेद की तरफ से एक कानूनी नोटिस दिया है।


ज्ञातव्य है कि टाटा मोटर्स अपने पिठ्ठू ट्रेड यूनियन के नेताओं की मदद से लगभग तीन दशकों से टाटा मोटर्स के पूर्व कर्मचारियों के पुत्रों और पुत्रियों से स्थायी स्वरूप के कार्य में अस्थायी कर्मचारियों के रूप में काम करवाती आ रही है। जिन्हें स्थायी कर्मचारियों को दी जाने वाली वेतन भत्ते आदि के मुकाबले महज 25-30% वेतन भत्ते ही दिये जाते हैं।


यह भी ज्ञातव्य है कि टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में लगभग 3500 से अधिक कर्मचारी बंधुआ मजदूर की तरह काम करते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 23 का सीधा उल्लंघन है। टाटा मोटर्स के इस अनफेयर लेबर प्रैक्टिस के चलते दर्जनों कर्मचारी दो दशकों से अधिक वर्षों तक काम करने के बाद भी स्थायी कर्मचारी नहीं बनाये गये और रिटायर हो गये।

ज्ञातव्य है कि पुणे प्लांट के कर्मचारियों द्वारा टाटा मोटर्स के अनफेयर लेबर प्रैक्टिस के खिलाफ दायर रिट पिटिशनों की सुनवाई के बाद बोम्बे उच्च न्यायालय ने आदेश पारित करते हुए टाटा मोटर्स को अनफेयर लेबर प्रैक्टिस का दोषी पाया है। टाटा मोटर्स को उन तमाम अस्थायी कर्मचारियों को उनके 240 दिन पूरे होने के बाद स्थायी कर्मचारियों के वेतनमान के अनुसार उनका बैक वेज की गणना कर, उन्हें पूरा वेतन देने का निर्देश दिया है। साथ में उन्हें 240 दिन के बाद स्थायी कर्मचारी मानने का भी निर्देश दिया है।

बोम्बे उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के बाद भी टाटा मोटर्स ने उन निर्देशों को जमशेदपुर प्लांट के अस्थायी कर्मचारियों के लिए लागू नहीं किया है और न ही जिला श्रम आयुक्त ने उन निर्देशों को लागू करने का निर्देश टाटा मोटर्स को दिया है।

अधिवक्ता अखिलेश ने जिला श्रम आयुक्त को कानूनी नोटिस द्वारा यह निर्देश दिया है कि वे बोम्बे उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सारे अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के वेतनमान के अनुसार 240 दिन काम करने के बाद प्रत्येक अस्थायी कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन बैक वेज की गणना करवा कर तत्काल दिलवायें। कर्मचारियों को स्थायी घोषित करवायें अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कारवाई करनी पड़ेगी। अधिवक्ता अखिलेश ने ऐसा ही निर्देश टाटा मोटर्स मैनेजमेंट को भी दिया है।

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